एएमपीआई की 31वीं नदर्न चैप्टर कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री का उद्बोधन
कहा, हम एआई और क्वांटम कंप्यूटिंग के माध्यम से चिकित्सा को दे रहे एक नया स्वरूप
जोधपुर, 20 मार्च। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री Gajendra Singh Shekhawat ने कहा कि आज का युग प्रिवेंटिव मेडिसिन का है। मेडिकल फिजिक्स अब केवल लैब तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कैंसर जैसे गंभीर रोगों के निदान और उपचार की आधारशिला बन चुकी है।
डॉ. एस.एन. मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार को ‘एसोसिएशन ऑफ मेडिकल फिजिसिस्ट्स ऑफ इंडिया’ (एएमपीआई) की 31वीं नदर्न चैप्टर कॉन्फ्रेंस चिकित्सा और विज्ञान के अनूठे संगम का गवाह बनी। उद्घाटन सत्र में केंद्रीय मंत्री Gajendra Singh Shekhawat ने कहा कि हमें इस बात को स्वीकार करना पड़ेगा कि आधुनिक चिकित्सा में भौतिकी का नवाचार और प्रभाव महत्वपूर्ण है। आज मेडिकल फिजिक्स केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं है, यह निदान और उपचार के केंद्र में आ खड़ी हुई है। इमेजिंग टेक्नोलॉजी और पीईटी-सीटी जैसी विधाओं के चलते कैंसर के उपचार में रेडियोलॉजिस्ट के लिए सटीक मात्रा में और सही दिशा में उपचार सुनिश्चित करना संभव हो पाया है।

Gajendra Singh Shekhawat ने कहा कि फिजिक्स आज आधुनिक चिकित्सा की मजबूत आधारशिला बनी है। अब हम जीनोम सीक्वेंसिंग और डीएनए प्रोफाइलिंग के माध्यम से प्रिवेंटिव मेडिसिन की तरफ बढ़ रहे हैं। हम उन बीमारियों को पहले ही देख पाएंगे, जो किसी व्यक्ति के जीवन में आने वाली हैं। ऐसे समय में मेडिकल फिजिसिस्ट की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाली है। उन्होंने कहा कि यदि हम मेडिकल इतिहास को देखें तो 150-200 साल पहले पैथोलॉजी के आविष्कार ने गति पकड़ी। फिर सर्जरी इवॉल्व हुई। उसके बाद एंटीबायोटिक्स ने बड़ा रोल प्ले किया। आज हम न्यूक्लियर मेडिसिन और मेटाफिजिक्स के युग में हैं। अब हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम कंप्यूटिंग के माध्यम से चिकित्सा को एक नया स्वरूप दे रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री Gajendra Singh Shekhawat ने कहा कि जोधपुर का रीजनल कैंसर इंस्टीट्यूट आने वाले समय में इस क्षेत्र के लिए बड़ा वरदान होने वाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के मेडिकल सेक्टर में अमूलचूल परिवर्तन हुए हैं। एम्स की संख्या बढ़ी है। हर जिले तक मेडिकल कॉलेज पहुंचे हैं। हमारा लक्ष्य सुलभ, सस्ती और विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवा है। आत्मनिर्भर भारत के तहत आज बहुत सारी कंपनियां भारत को अपना मैन्युफैक्चरिंग हब बना रही हैं। उन्होंने कहा कि आज दुनिया में जियोपॉलिटिकल टर्बुलेंस है। मेंटल स्ट्रेस, क्लाइमेट चेंज और पॉल्यूशन जैसी चुनौतियां मानव स्वास्थ्य के सामने खड़ी हैं। इन सबका समाधान ‘होलिस्टिक वेलनेस’ में है। पूरी दुनिया भारत की तरफ आशा भरी दृष्टि से देख रही है कि हम इंटीग्रेटेड मेडिसिन के माध्यम से समाधान देंगे।

तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में देश भर से आए प्रख्यात वैज्ञानिकों, रेडियोलॉजिकल विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं ने ‘फिजिक्स एंड मॉडर्न मेडिसिन : इनोवेशन, इंटीग्रेशन एंड इम्पैक्ट’ विषय पर गहन चर्चा की। कॉन्फ्रेंस का मुख्य उद्देश्य आधुनिक चिकित्सा में भौतिकी के बढ़ते प्रभाव और इसके जरिए स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सटीक व सुलभ बनाना रहा। सम्मेलन के तकनीकी सत्रों में ‘क्वांटम कंप्यूटिंग इन मेडिसिन’ और ‘एडवांस्ड इमेजिंग तकनीक’ पर कई शोध पत्र भी प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम में एस.एन. मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. बी.एस. जोधा, डीआरडीओ डिफेंस लैब के निदेशक बी.एस. श्योराण, रीजनल कैंसर इंस्टीट्यूट के डॉ. देवेश शर्मा, डॉ. फतेह सिंह, डॉ. प्रभात शर्मा सहित चिकित्सा जगत की कई हस्तियां मौजूद रहीं।
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