रंग, उमंग और आपसी सद्भाव का त्यौहार, होली। जब हम होली का त्यौहार मना रहे होते हैं, वहीं दूसरी तरफ खाकी वर्दी अपना किरदार निभा रही होती है। किरदार, आपको सुरक्षित रखने का, जिससे आप भयमुक्त, अपने परिवार के साथ, साथियों के साथ त्यौहार मना सकें। लेकिन इसी तस्वीर का एक दूसरा पहलू यह भी है कि जो आपके त्यौहारों के लिए अपने परिवार जनों से दूर रहते हैं, आखिर वे भी तो इंसान हैं। उनका भी मन करता होगा कि वे भी अपनों के साथ त्यौहार मनाएं। लेकिन उनके चेहरे पर गुलाल नहीं, ड्यूटी का रंग होता है और ‘वर्दी’ की जेब में मुड़ी हुई होती है, एक अधूरी ‘होली’।
