सोनम वांगचुक की ‘रिहाई’, समझौता या ‘दुहाई’

MK Saini
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गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम का प्रयोग करते हुए सोनम वांगचुक की हिरासत को त्तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है।
मतलब साफ है कि सोनम वांगचुक एक बार फिर बाहर आएंगे। इस खबर के आने के बाद से लगातार सोनम वांगचुक के समर्थकों में जोश और नई उत्साह का संचार हो गया है लेकिन एक बार फिर से इसपर राजनीति गर्मा गई है।
गृह मंत्रालय का कहना है कि सरकार लद्दाख में शांति, स्थिरता और आपसी विश्वास का माहौल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, इसलिए सोनम वांगचुक को रिहा कर रही है।
गृह मंत्रालय ने इस संबंध में बयान जारी करते हुए कहा है कि सरकार लद्दाख को सुरक्षा उपाय प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराती है।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि सोनम वांगचुक के आने की खबर सुखद तो है, लेकिन इससे एक बार फिर से मोदी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होते हैं।
उन्होंने कहा कि कोई भी अगर पीएम मोदी और उनकी नीतियों की बुराई करता है तो उसपर गंभीर आरोप लगा दिए जाते हैं, ये और बात है कि मामला शांत होने के बाद उसे बरी करना मजबूरी हो जाती है।
कुछ इसी तरह के रिएक्शन और भी दूसरे नेताओं के देखने मिले हैं, जो भाजपा को घेरने के लिए काफी है।
विपक्ष के नेता इस मामले में सीधे पर केंद्र सरकार पर हमलावर है…उनका कहना है की
यह कैसी विडंबना है ? सोनम वांगचुक जबतक मोदी जी की नीतियों के समर्थक रहे, तब तक सब सही था। जैसे ही उन्होंने लद्दाख के हक और पर्यावरण की आवाज उठाई, तो वो गलत हो गए।
और NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) जैसे कठोर कानून की तहत धाराएं लगा दी गईं।

विपक्ष के मुताबिक जिसे कुछ महीने पहले देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताया गया था उसे आज इसलिए रिहा कर दिया गया कि उनके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिले।
अब सवाल ये है कि उनकी हिरासत के 170 दिनों का हिसाब कौन देगा? उन्हें गिरफ्तार क्यों किया गया था?

कुछ और सवाल हैं जो सोशल मीडिया में लोग मोदी सरकार से पूछ रहे हैं, लोगो का मानना है की
क्या राष्ट्रीय सुरक्षा की परिभाषा अब केंद्र सरकार के राजनीतिक नफा-नुकसान से तय होगी? लोग इसे बीजेपी का तानाशाही चेहरा तक बताने लगे है…
चलिए अब आपको ये बताते है की आखिर ये पूरा मामला क्या है जिसके चलते एक एक्टिविस्ट के एनएसए जैसे कानून की जद में गिरफ्तार किया गया..
पिछले साल सितंबर सोनम की गिरफ्रतारी लेह में हुए उन विरोध प्रदर्शनों के सिलसिले में थी, जिन्होंने इस क्षेत्र को हिलाकर रख दिया था।

वांगचुक पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) लगाकर राजस्थान की जोधपुर जेल में डाल दिया गया।
उस समय सरकार ने कहा कि हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद ‘सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने’ के लिए वांगचुक को हिरासत में लिया गया था।

170 दिनों तक जेल में रहने के बाद सोनम वांगचुक अब बाहर आ गए हैं। ऐसे में गृह मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि लद्दाख से जुड़े मुद्दों का समाधान हाई-पावर्ड कमेटी और अन्य संवाद मंचों के जरिए निकाला जाएगा।

अगर रिहा ही करना था तो फिर सवाल है कि गिरफ्तारी क्यों थी ?

क्या कोई समझौता हुआ है ?

या फिर सरकार को जो अपनी ताकत का एहसास सोनम वांगचुक को करवाना था वो करवा चुकी है।
इन सवालों के जवाब ढुंढने की जिम्मेदारी हम अपने दर्शकों पर छोड़ते हैं….

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Written BY – Nishant Sharma

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