Enterprises: सूक्ष्म व लघु को राहत: 3 महीने में 342 करोड़ के मामलों की सुनवाई

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जयपुर : राज्य के सूक्ष्म और लघु Enterprises के लंबित भुगतान के प्रकरणों के निस्तारण के लिए गठित सूक्ष्म एवं लघु उद्यम सुविधा परिषदों की पिछले 3 महीने से निरंतर बैठकें आयोजित की जा रही हैं। इसी कड़ी में उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त सुरेश ओला की अध्यक्षता में शुक्रवार को सूक्ष्म एवं लघु उद्यम सुविधा परिषद—प्रथम की बैठक आयोजित हुई। इसमें कुल 37.44 करोड रुपये के 17 प्रकरणों की सुनवाई की गई।

ओला ने बताया कि पिछले 3 माह में राज्य की सुविधा परिषदों की कुल 35 बैठकों का आयोजन किया जा चुका है। इनमें विलम्बित भुगतान के कुल 342 करोड रूपये के 870 प्रकरणों की सुनवाई की गई, जिनमें से लगभग 47.48 करोड रूपये के 187 प्रकरणों का निस्तारण कर सूक्ष्म एवं लघु Enterprises को राहत पहुंचाई गई। सुविधा परिषद मुख्यालय—प्रथम की 3 महिने में 6 बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। इनमें विलम्बित भुगतान के 290.89 करोड रूपये के 93 प्रकरणों की सुनवाई की गई।

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राज्य में 14 सुविधा परिषद—

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास (एमएसएमईडी) अधिनियम, 2006 के तहत देशभर में सूक्ष्म और लघु Enterprises के विलंबित भुगतान विवादों के समाधान के लिए विभिन्न स्तर पर सुविधा परिषदों का गठन किया गया है। इसके तहत राजस्थान में 14 सुविधा परिषद गठित की गई हैं। दो राज्य स्तरीय परिषद हैं। आयुक्त उद्योग एवं वाणिज्य की अध्यक्षता वाली राज्य स्तरीय सुविधा परिषद में 75 लाख से अधिक राशि वाले प्रकरणों की सुनवाई होती है।

वरिष्ठ अतिरिक्त निदेशक की अध्यक्षता दूसरी राज्य स्तरीय परिषद में 25 लाख से अधिक और 75 लाख से कम राशि वाले प्रकरणों की सुनवाई की जाती है। 25 लाख रुपये से कम राशि वाले प्रकरणों की सुनवाई के लिए संभाग स्तरीय सुविधा परिषद है। प्रकरणों की अधिकता को देखते हुए जयपुर संभाग में 6 परिषद हैं और अन्य सभी संभगों में 1-1 परिषद है।

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अब सूक्ष्म एवं लघु उद्यम ऑनलाइन ओडीआर पोर्टल पर कर सकते हैं विलम्बित भुगतान के आवेदन

राज्य के सूक्ष्म एवं लघु Enterprises लंबित भुगतान के प्रकरण ऑनलाइन विवाद समाधान (ओडीआर) पोर्टल पर कर आवेदन कर सकते हैं। यह पोर्टल विलंबित भुगतान मामलों का अंत से अंत तक डिजिटल समाधान प्रदान करता है। इस पोर्टल पर सारी जानकारी अपलोड करने के बाद यह प्रकरण की राशि और क्षेत्र के अनुसार संबंधित सुविधा परिषद को ट्रांसफर हो जाता है।

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