Farmers: डूंगरपुर जिले के सागवाड़ा में आज खेती की नई इबारत लिखी गई। ग्राम पंचायत वामसा की राधा कृष्ण गौशाला में भारतीय किसान संघ के तत्वावधान में हजारों किसानों का सैलाब उमड़ा। अवसर था ‘गोधरित प्राकृतिक खेती’ सम्मेलन का, जहाँ किसानों ने यूरिया और पेस्टीसाइड को त्याग कर ‘धरती मां’ को बचाने की शपथ ली। इस दौरान सागवाड़ा विधायक शंकरलाल डेचा ने किसानों के हित में एक बड़ी सरकारी घोषणा भी साझा की।
Farmers: सागवाड़ा की राधा कृष्ण गौशाला आज पारंपरिक और आधुनिक वैज्ञानिक खेती के संगम का गवाह बनी। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता गोपालजी सुथारिया ने विजुअल प्रजेंटेशन के जरिए किसानों को बताया कि रासायनिक खाद किस तरह हमारी मिट्टी को बंजर बना रहे हैं और कैंसर जैसी बीमारियों का जहर फैला रहे हैं।
Farmers: सम्मेलन का सबसे खास आकर्षण रहा 8 साल का नन्हा बालक आदर्श डेंडर। जब इस छोटे से बच्चे ने मंच पर प्राकृतिक कल्चर बनाने की पूरी प्रक्रिया समझाई, तो वहां मौजूद अनुभवी किसान भी दंग रह गए। नन्हे आदर्श ने संदेश दिया कि भविष्य की खेती केवल गोवंश पर आधारित प्राकृतिक खेती ही है।
Farmers: कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सागवाड़ा विधायक शंकरलाल डेचा ने राज्य सरकार की ओर से बड़ी सौगात साझा की। विधायक ने घोषणा की कि राज्य सरकार अब बैल से खेती करने वाले किसानों को 30,000 की प्रोत्साहन राशि प्रदान करेगी। विधायक ने जोर दिया कि देशी गाय का गोबर और गौ-मूत्र ही आर्थिक समृद्धि का असली आधार है।
Farmers: सम्मेलन के दौरान किसानों ने एक महत्वपूर्ण मांग भी उठाई। किसानों का कहना था कि जिस तरह ‘बैल से खेती’ पर 30,000 की सहायता दी जा रही है, उसी तर्ज पर ‘गाय पालने वाले पशुपालकों’ को भी विशेष आर्थिक सहायता दी जाए।
Farmers: इस मांग पर विधायक शंकरलाल डेचा ने पशुपालको को आश्वस्त किया कि वे इस विषय पर सरकार से बात करेंगे और पूरी कोशिश करेंगे कि आने वाले समय में पशुपालकों के हित में भी सरकार बड़ी घोषणा करे! कार्यक्रम का सफल संचालन गणेशजी पाटीदार ने किया। इस मौके पर गौशाला संस्थापक वीरेन्द्रजी, कथा वाचक कमलेश भाई शास्त्री सहित क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिक और भारी संख्या में किसान मौजूद रहे।
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