भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में बढ़त दर्ज की गई। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और बैंकिंग शेयरों में मजबूत खरीदारी के चलते बाजार ने आईटी सेक्टर की कमजोरी के बावजूद सकारात्मक बढ़त हासिल की।
BSE Sensex 254 अंकों की बढ़त के साथ 77,409.98 पर बंद हुआ, जबकि NSE Nifty 82 अंकों की तेजी के साथ 24,168 के स्तर पर पहुंच गया। पिछले पांच कारोबारी दिनों में Sensex करीब 4.8 प्रतिशत और Nifty लगभग 4.3 प्रतिशत मजबूत हुआ है।
दिनभर बाजार सीमित दायरे में कारोबार करता रहा, लेकिन अंतिम घंटे में तेज खरीदारी देखने को मिली। विदेशी निवेशकों की संभावित खरीदारी और कच्चे तेल की नरम होती कीमतों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट बनी सबसे बड़ी ताकत
भारतीय बाजारों को सबसे बड़ा सहारा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट से मिला। अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के बाद वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
ब्रेंट क्रूड की कीमतें गिरकर लगभग 77.8 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 76 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बना रहा।
विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की सस्ती कीमतें भारत के लिए फायदेमंद हैं क्योंकि इससे महंगाई पर नियंत्रण रखने में मदद मिलती है, चालू खाते का घाटा कम होता है और रुपये को मजबूती मिलती है।
बैंकिंग शेयरों ने बाजार को दी मजबूती
गुरुवार के कारोबार में बैंकिंग और वित्तीय कंपनियों के शेयरों ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया।
Nifty फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स में 0.73 प्रतिशत, Nifty पीएसयू बैंक में 0.66 प्रतिशत और Nifty प्राइवेट बैंक में 0.49 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
प्रमुख शेयरों में एसबीआई 1.64 प्रतिशत, एचडीएफसी बैंक 1.49 प्रतिशत, एक्सिस बैंक 0.67 प्रतिशत और आईसीआईसीआई बैंक 0.39 प्रतिशत मजबूत होकर बंद हुए।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार बेहतर क्रेडिट ग्रोथ की उम्मीद और आकर्षक वैल्यूएशन के कारण बैंकिंग शेयरों में निवेशकों की रुचि बढ़ी है।
आईटी सेक्टर पर दबाव बरकरार
जहां एक ओर बैंकिंग शेयरों ने बाजार को सहारा दिया, वहीं आईटी कंपनियों पर दबाव बना रहा। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति के संकेतों ने टेक्नोलॉजी शेयरों में बिकवाली बढ़ा दी।
Nifty आईटी इंडेक्स में 1.19 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इंफोसिस सबसे ज्यादा नुकसान में रहा और उसके शेयर 2.66 प्रतिशत टूट गए। इसके अलावा टेक महिंद्रा, टीसीएस और एचसीएल टेक के शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली।
विश्लेषकों का कहना है कि यदि अमेरिका में ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो वैश्विक टेक्नोलॉजी खर्च प्रभावित हो सकता है, जिसका असर भारतीय आईटी कंपनियों पर पड़ सकता है।
इंडिगो, ट्रेंट और बीईएल रहे चमकते सितारे
Sensex के प्रमुख लाभार्थियों में इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो), ट्रेंट और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) शामिल रहे।
इंडिगो के शेयर करीब 2.73 प्रतिशत, ट्रेंट 2.52 प्रतिशत और बीईएल 2.08 प्रतिशत चढ़े। इसके अलावा एनटीपीसी, एसबीआई, एचडीएफसी बैंक, पावर ग्रिड, हिंदुस्तान यूनिलीवर, अडानी पोर्ट्स और टाटा स्टील में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली।
वहीं नुकसान वाले शेयरों में इंफोसिस, टेक महिंद्रा, मारुति सुजुकी, टीसीएस और एचसीएल टेक शामिल रहे।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी उत्साह
बड़े शेयरों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में भी निवेशकों का भरोसा कायम रहा।
Nifty स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 0.44 प्रतिशत, Nifty मिडकैप 100 में 0.41 प्रतिशत और Nifty मिडकैप 50 में 0.32 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
इस बीच बाजार की अस्थिरता को मापने वाला इंडिया वीआईएक्स करीब 3.9 प्रतिशत घटकर 12.67 पर आ गया, जो निवेशकों के बढ़ते आत्मविश्वास का संकेत माना जा रहा है।
आगे किन बातों पर रहेगी नजर?
आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान संबंधों में आगे होने वाले घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों की दिशा और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर संबंधी संकेतों पर बनी रहेगी।
फिलहाल तेल की कीमतों में नरमी भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत दे रही है। हालांकि आईटी सेक्टर में निवेशकों का रुख तब तक सतर्क रह सकता है, जब तक वैश्विक ब्याज दरों और आर्थिक गतिविधियों को लेकर अधिक स्पष्टता नहीं मिल जाती।
Edited by: Bhoomi Goyal
