NEET 2026 पेपर लीक का सबसे बड़ा खुलासा! नासिक से सीकर तक पूरा नेटवर्क बेनकाब…

Rakesh Sharma - National Head
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यहां बच्चे रात-रात भर जागकर ऑर्गेनिक केमिस्ट्री रट रहे हैं, और उधर कोई AC कमरे में बैठकर पेपर पैकेज फॉरवर्ड कर रहा है। देश में दो तरह के स्टूडेंट पैदा हो चुके हैं एक वो जो लाइब्रेरी में पढ़-पढ़कर मर रहे हैं और दूसरे वो जिनके पास Telegram का VIP लिंक है। किसी किसान का बाप खेत बेच रहा है, कोई मां अपनी चूड़ियां गिरवी रख रही है, कोई बच्चा गांव में बिजली जाने के बाद लालटेन में पढ़ रहा है और आखिर में रिजल्ट क्या निकलता है? “मेहनत करने वाले लाइन में लगो सेटिंग वालों का चयन पहले होगा।” सच बताओ ये एग्जाम है या बोली लगने वाला ठेका ? देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET अब सिर्फ एक पेपर लीक विवाद नहीं रह गई है बल्कि जांच एजेंसियों को शक है कि यह देशभर में फैला एक संगठित नेटवर्क हो सकता है।

राजस्थान से लेकर हरियाणा, दिल्ली, केरल, जम्मू-कश्मीर और बिहार तक फैली जांच में अब ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि कथित पेपर लीक की पूरी चेन बेहद सुनियोजित तरीके से काम कर रही थी। सूत्रों के मुताबिक जांच एजेंसियों को शुरुआती पड़ताल में जो रूट मिला है, उसने पूरे सिस्टम को हिला दिया है। दावा किया जा रहा है कि कथित पेपर पहले नासिक से निकला फिर हरियाणा पहुंचा वहां से जयपुर फिर जमवारामगढ़ और उसके बाद सीकर तक पहुंचा। इसके बाद सीकर से यही पेपर जम्मू-कश्मीर, बिहार, केरल और उत्तराखंड तक फैलाया गया। अब इस पूरे मामले की जांच CBI के हाथ में है और राजस्थान ATS-SOG लगातार उससे इनपुट साझा कर रही है। पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा राजस्थान के सीकर की हो रही है। जांच एजेंसियों का मानना है कि पेपर का सबसे बड़ा सर्कुलेशन यहीं से हुआ।

कोटा के बाद पिछले कुछ वर्षों में सीकर तेजी से देश के बड़े कोचिंग हब के रूप में उभरा है। मेडिकल और इंजीनियरिंग परीक्षाओं की तैयारी के लिए यहां हजारों छात्र देशभर से आते हैं। इसी भीड़ इसी भरोसे और इसी कोचिंग नेटवर्क के बीच कथित गेस पेपर को फैलाया गया। सूत्रों के मुताबिक छात्रों को यह कहकर पढ़ाया गया “यही आएगा” और सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जांच में बायोलॉजी के सभी 90 और केमिस्ट्री के सभी 45 सवाल परीक्षा से पहले चुनिंदा लोगों तक पहुंचने के संकेत मिले हैं।

अगर यह दावा सही साबित होता है, तो यह सिर्फ गेस पेपर नहीं सीधे-सीधे पेपर लीक का मामला है। जांच एजेंसियों के मुताबिक कथित क्वेश्चन बैंक में मौजूद बड़ी संख्या में सवाल असली परीक्षा में हूबहू पाए गए। सूत्रों का दावा है कि करीब 140 सवाल सीधे मैच हुए। NEET में हर सवाल 4 अंक का होता है यानि लगभग 600 नंबर तक का फायदा। सोचिए जिस छात्र ने ईमानदारी से पढ़ाई की, वो मुकाबला कैसे करेगा उससे जिसके पास पहले से पूरा पेपर था?

शिक्षा विशेषज्ञ भी कह रहे हैं कुछ सवाल मिल जाना संयोग हो सकता है लेकिन इतनी बड़ी संख्या में प्रश्नों का एक जैसा होना संयोग नहीं सिस्टम की हार है। पूरे मामले में एक और बड़ा खुलासा सामने आया है। जांच में दावा किया गया है कि परीक्षा से पहले कुछ छात्रों को फोन कर कहा गया “पेपर आ गया है…” सूत्रों के मुताबिक यह कॉल दिल्ली से आया था और इसके बाद सीकर में तेजी से कथित पेपर का सर्कुलेशन शुरू हुआ। बताया जा रहा है कि शुरुआत में यह सामग्री लाखों रुपये में बेची गई। लेकिन परीक्षा नजदीक आते-आते कई छात्रों ने इसे खुद ही 5 हजार से 30 हजार रुपये तक में आगे बेचना शुरू कर दिया। यानि पूरा नेटवर्क
लालच… कमीशन… और धंधे में बदल गया। जांच एजेंसियों को अब शक है कि यह सिर्फ छात्रों तक सीमित मामला नहीं था।

सूत्रों के मुताबिक कई कोचिंग संस्थानों, MBBS काउंसलिंग से जुड़े लोगों और हॉस्टल नेटवर्क की भूमिका भी जांच के दायरे में है। सीकर के एक कोचिंग संचालक को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई है। वहीं राकेश नाम का एक व्यक्ति भी जांच एजेंसियों के रडार पर आया है, जो कथित तौर पर बड़े कोचिंग संस्थानों के बाहर
MBBS काउंसलिंग का काम करता था।

आरोप है कि उसने 30 हजार रुपये में यह पेपर अपने एक साथी को बेचा, जो केरल में MBBS का छात्र बताया जा रहा है और मामला सिर्फ WhatsApp तक सीमित नहीं था। कई एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के जरिए इसे शेयर किए जाने के संकेत मिले हैं। कुछ मोबाइल फोन में “Forwarded Many Times” टैग भी मिला है। यानि पेपर सिर्फ लीक नहीं हुआ बल्कि खुले बाजार में घूमता रहा। SOG अब सोशल मीडिया चैट, कॉल डिटेल्स, बैंक ट्रांजैक्शन और पूरे डिजिटल ट्रेल की जांच कर रही है।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी वही है हर बार वही पुराना डायलॉग “जांच होगी… दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा…” फिर कुछ छोटे दलाल पकड़े जाते हैं… दो-चार फोटो खिंचती हैं और असली मगरमच्छ अगले एग्जाम की तैयारी में लग जाते हैं। यह सिर्फ पेपर लीक नहीं है ये लाखों युवाओं के भरोसे का पोस्टमार्टम है। देश का गरीब बच्चा आज भी यही सोचकर पढ़ रहा है मेहनत करेंगे तो जिंदगी बदल जाएगी। लेकिन सिस्टम बार-बार उसके कान में फुसफुसा रहा है “मेहनत नहीं भाई…
नेटवर्क चाहिए।” और फिर कुछ लोग पूछते हैं— युवा इतना गुस्से में क्यों है? अरे गुस्सा नहीं होगा तो क्या आरती उतारेगा? जिस देश में नौकरी कम हो, सीटें कम हों फीस आसमान पर हो और ऊपर से पेपर भी बिकने लगे वहां युवा किताब नहीं सिस्टम से लड़ रहा होता है क्योंकि लोकतंत्र में सबसे खतरनाक चीज़ विपक्ष नहीं होती सबसे खतरनाक चीज़ होती है जनता का चुप हो जाना। जिस दिन गरीब और मध्यमवर्गीय बच्चे ने ये मान लिया कि ईमानदारी से कुछ नहीं होगा उस दिन सिर्फ एक एग्जाम रद्द नहीं होगा बल्कि रद्द होगा पूरा का पूरा सरकारी तंत्र। जहां पढ़ाई के नाम पर खेल हो रहा है और खेल के नाम पर खेलवाड़।

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