एक तरफ दुनिया भारत के साथ डील साइन कर रही है, दूसरी तरफ देश की राजनीति बयानबाज़ी में फंसी हुई है,और इसी बीच पुलवामा के जख्म से जुड़ा एक बड़ा नाम हमेशा के लिए खत्म हो गया।
3 बड़े घटनाक्रम
आज बात होगी तीन ऐसे बड़े घटनाक्रमों की, जिनका असर सिर्फ आज की हेडलाइन तक सीमित नहीं रहने वाला, बल्कि आने वाले दिनों में भारत की राजनीति, अर्थव्यवस्था, सुरक्षा, और जनता के मूड तक को प्रभावित करेगा। तो चलिए शुरू करते हैं पहली बड़ी खबर से…..
पहला घटनाक्रम
15 मई से 21 मई के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने UAE, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली का दौरा किया लेकिन ये सिर्फ फोटो खिंचवाने वाला विदेशी टूर नहीं था, ये वो दौरा था जहां भारत ने दुनिया को साफ संदेश दिया अब हम सिर्फ खरीददार नहीं, सप्लाई चेन का सेंटर बनना चाहते हैं। 50 से ज्यादा ग्लोबल CEOs से मुलाकात, ₹3.8 लाख करोड़ निवेश की संभावनाएं, ऊर्जा सुरक्षा से लेकर सेमीकंडक्टर तक बड़े समझौते, यानि भारत अब “सस्ता मजदूर” वाली इमेज से निकलकर High-Tech Power बनने की कोशिश में है।

UAE में तेल, LPG, ग्रीन एनर्जी और रक्षा सहयोग पर 7 बड़े समझौते हुए। अबूधाबी नेशनल ऑयल कंपनी भारत के लिए 3 करोड़ बैरल तेल स्टोर करेगी मतलब,दुनिया में तेल संकट हो तो भी भारत लाइन में खड़े रहने वाला देश नहीं बनना चाहता। नीदरलैंड में सेमीकंडक्टर और AI पर बड़ा फोकस रहा। ASML जैसी कंपनियों का भारत के साथ जुड़ना सीधे चीन-ताइवान निर्भरता को चुनौती माना जा रहा है। दूसरे शब्दों में कहें तो, दुनिया अब सिर्फ Made in China नहीं, Made with India की तैयारी कर रही है। स्वीडन और नॉर्वे के साथ 6G, Green Industry, Arctic Research और Blue Economy पर समझौते हुए। और इटली में IMEC Corridor पर बातचीत, यानि भारत अब सिर्फ South Asia की राजनीति नहीं, Global Trade Routes की chessboard पर भी अपनी चाल चल रहा है। लेकिन सवाल वही है, इतने बड़े निवेश और समझौतों का फायदा जमीन पर आम आदमी तक कब पहुंचेगा? क्योंकि भारत में घोषणाएं अक्सर GDP से ज्यादा,TV डिबेट में दिखाई देती हैं।
दूसरा घटनाक्रम
अब बात उस बयान की जिसने दिल्ली से लेकर जयपुर तक, सियासी तापमान बढ़ा दिया। राहुल गांधी ने, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह को “गद्दार” कहा,
और बस फिर क्या था,BJP ऐसे टूट पड़ी जैसे चुनाव आयोग ने मतदान की तारीख घोषित कर दी हो। जेपी नड्डा बोले ,राहुल गांधी लगातार संवैधानिक पदों का अपमान करते हैं। अनुराग ठाकुर ने कहा जो लोग देश विरोधी ताकतों की भाषा बोलते हैं, उन्हें जनता जवाब देना जानती है। राजस्थान बीजेपी अध्यक्ष मदन राठौड़ ने भी हमला बोला कि कांग्रेस अब सिर्फ विवाद की राजनीति कर रही है। लेकिन कांग्रेस भी पीछे हटने को तैयार नहीं। मल्लिकार्जुन खड़गे बोले , राहुल गांधी जनता की भावनाएं उठा रहे हैं। प्रियंका गांधी ने कहा , बीजेपी आलोचना सुनना ही नहीं चाहती। लेकिन सबसे बड़ा punch यहां आया, राहुल गांधी ने साफ कर दिया , “माफी नहीं मांगेंगे।” यानि आने वाले दिनों में,ये मुद्दा संसद से ज्यादा Prime Time की TRP बढ़ाने वाला है। और सच कहें तो, भारत की राजनीति अब बहस कम, Dialogue Delivery ज्यादा लगने लगी है।जहां मुद्दों से ज्यादा एक लाइन वायरल होना जरूरी हो गया है।

तीसरा घटनाक्रम
अब बात उस खबर की जिसने करोड़ों भारतीयों को एक अजीब सी तसल्ली दी। 2019 पुलवामा आतंकी हमले का मास्टरमाइंड माना जाने वाला हमजा बुरहान PoK के मुजफ्फराबाद में मारा गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक अज्ञात हमलावरों ने उसे गोलियों से भून दिया। बताया जा रहा है कि वो लंबे समय से एक शिक्षक बनकर छिपा हुआ था। लेकिन इतिहास चेहरा बदलने से नहीं बदलता। 14 फरवरी 2019, जब पुलवामा में CRPF के 40 से ज्यादा जवान शहीद हुए थे, उस दर्द को देश आज भी नहीं भूला। हमजा बुरहान आतंकी संगठन अल बद्र से जुड़ा था और लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर था। अब उसकी मौत को आतंकवाद के खिलाफ बड़ी चोट माना जा रहा है। हालांकि भारत सरकार ने आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन पाकिस्तान में हमेशा की तरह RAW का नाम उछालने की कोशिशें शुरू हो गई हैं। क्योंकि पाकिस्तान में जब भी कोई आतंकी मरता है, तो वहां दो चीजें तुरंत मिलती हैं , एक “षड्यंत्र theory”, और दूसरा भारत पर आरोप। लेकिन भारत के लिए ये खबर सिर्फ एक मौत की खबर नहीं, ये उन परिवारों के लिए एक अधूरी न्याय भावना जैसी है जिन्होंने पुलवामा में अपने बेटे खोए थे।

फिलहाल, मोदी का Global Push, राहुल का Political Punch, और पुलवामा mastermind का अंत, इन तीनों घटनाओं ने आज देश का पूरा narrative बदल दिया है। अब आपकी राय क्या है? क्या मोदी का ये दौरा भारत को Global Power बनाएगा? क्या राहुल गांधी का बयान राजनीतिक हमला था या सीमा पार कर गया? और पुलवामा mastermind की मौत को क्या आप न्याय मानते हैं?
