- स्थान:सागवाड़ा, डूंगरपुर (राजस्थान)
- संवाददाता:सादिक़ अली
डूंगरपुर।आमतौर पर एक बाइक मैकेनिक का काम नट-बोल्ट कसना और खराब इंजनों को दुरुस्त करना होता है। लेकिन राजस्थान के डूंगरपुर जिले में एक ऐसा मैकेनिक भी है, जिसने मशीनों को सुधारते-सुधारते बिखरते हुए परिवारों को सहेजने का जिम्मा उठा लिया है। गैरेज की कालिख और टूटे हुए कलपुर्जों के बीच काम करने वाले इस युवा का नाम है—चिराग मेहता।
चिराग आज डूंगरपुर में सिर्फ गाड़ियां ठीक नहीं कर रहे, बल्कि सड़क हादसों में असमय टूटने वाली सांसों को बचाकर मानवता की एक नई इबारत लिख रहे हैं। पुलिस प्रशासन के साथ मिलकर शुरू किया गया उनका‘जान है जहान है‘अभियान आज पूरे जिले में मिसाल बन चुका है।
जब एक्सीडेंट की गाड़ियों पर लगे खून के धब्बों ने झकझोर दिया
सागवाड़ा के रहने वाले चिराग मेहता के दिल में यह कसक यूं ही पैदा नहीं हुई। चिराग बताते हैं, “मेरी दुकान पर जब भी दुर्घटनाग्रस्त बाइक आती थी, तो उसके टूटे हुए हिस्से और उन पर लगे खून के धब्बे मुझे अंदर तक झकझोर देते थे। मैं मैकेनिक हूँ, बाइक तो ठीक कर देता था… लेकिन मन में हमेशा यह सवाल कौंधता था कि उस पर बैठने वाले इंसान का क्या हुआ होगा? क्या वो कभी सही-सलामत अपने घर लौट पाया?”
इसी बेचैनी ने चिराग को रातों को सोने नहीं दिया। अपनी कमजोर आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना, उन्होंने सड़क सुरक्षा का सिपाही बनने की ठानी। उन्होंने प्रशासन के सामने जागरूकता का एक खाका रखा और22 फरवरी 2026को जिले के जेठाना गांव से आधिकारिक तौर पर ‘जान है जहान है’ अभियान का शंखनाद कर दिया।
दिन में दुकान पर पसीना, रात को गांवों में चौपाल
चिराग का जज्बा ऐसा है कि वे दिनभर अपने गैरेज में हाड़-तोड़ मेहनत करते हैं और सूरज ढलते ही गांवों की तरफ निकल जाते हैं। डूंगरपुर पुलिस और प्रशासन के कंधा से कंधा मिलाकर चिराग अब तकनंदोद, भीलूड़ा, टामटिया और वरदा समेत 14 ग्राम पंचायतोंमें जागरूकता सभाएं (चौपाल) कर चुके हैं।
सिर्फ बातें नहीं, धरातल पर काम: अभियान का रिपोर्ट कार्ड
- 200+ हेलमेट वितरण:भामाशाहों और समाजसेवियों के सहयोग से अब तक दो सौ से ज्यादा जरूरतमंद वाहन चालकों को हेलमेट बांटे जा चुके हैं।
- 5,000 रिफ्लेक्टर का लक्ष्य:रात के अंधेरे में होने वाले हादसों को रोकने के लिए वाहनों पर 5,000 रिफ्लेक्टर (रेडियम) लगाने का काम तेजी से जारी है।
- बेसहारा गौवंश की सुरक्षा:रात में सड़कों पर बैठने वाले बेसहारा मवेशियों के कारण होने वाले हादसों को रोकने के लिए उनके गले में ‘रेडियम बेल्ट’ बांधने की विशेष योजना तैयार की गई है।
प्रशासन और जनता का मिला अटूट विश्वास
शुरुआत में अकेले चले चिराग की इस निस्वार्थ सेवा को देखकर डूंगरपुर पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने भी उन्हें पूरा सपोर्ट दिया है। आज स्थिति यह है कि जब हाथ में हेलमेट लिए चिराग ग्रामीणों के बीच हाथ जोड़कर खड़े होते हैं, तो लोग उनकी बात को टाल नहीं पाते और सड़क नियमों को मानने का संकल्प लेते हैं।
चिराग मेहता की यह कहानी इस बात का जीता-जागता सबूत है कि समाज में बड़ा बदलाव लाने के लिए किसी ऊंचे पद, रसूख या बहुत सारे पैसों की जरूरत नहीं होती; बस एक संवेदनशील दिल और अटूट संकल्प ही काफी है। एक साधारण मैकेनिक होकर भी उन्होंने सड़क सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दे पर जिस तरह प्रशासन और आम जनता के बीच एक सेतु (पुल) का काम किया है, वह वाकई काबिले तारीफ है।
सागवाड़ा का यह मैकेनिक आज डूंगरपुर के लोगों के लिए किसी “देवदूत” से कम नहीं है, जो अपनी लगन से दूसरों के घरों के ‘चिरागों’ को बुझने से बचा रहा है।
