रिलायंस इंडस्ट्रीज की वार्षिक आम बैठक (AGM) में कंपनी के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि जियो प्लेटफॉर्म्स अब सार्वजनिक बाजार में सूचीबद्ध होने की दिशा में आगे बढ़ रही है। कंपनी के बोर्ड ने प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) से जुड़े ड्राफ्ट दस्तावेज को मंजूरी दे दी है, जिसे नियामक संस्था सेबी के पास जमा करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
बैठक के दौरान अंबानी ने कहा कि जियो ने बीते वर्षों में ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क और मोबाइल टावरों के माध्यम से देशभर में डिजिटल कनेक्टिविटी का मजबूत ढांचा तैयार किया है। अब कंपनी अगली पीढ़ी की तकनीकों पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिसमें सैटेलाइट और एरियल नेटवर्किंग समाधान भी शामिल हैं। उनका मानना है कि इससे दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने में मदद मिलेगी।
IPO के तहत जारी होंगे करोड़ों नए शेयर
कंपनी द्वारा शेयर बाजार को दी गई जानकारी के अनुसार, प्रस्तावित आईपीओ के तहत 10 रुपये अंकित मूल्य वाले लगभग 27 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे। शेयरों का अंतिम मूल्य निवेशकों की मांग और बुक बिल्डिंग प्रक्रिया के आधार पर तय किया जाएगा।
मुकेश अंबानी ने कहा कि जियो की संभावित लिस्टिंग केवल कंपनी के लिए ही नहीं, बल्कि भारत के तकनीकी क्षेत्र के लिए भी एक महत्वपूर्ण अवसर होगी। इससे दुनिया के सामने भारतीय कंपनियों की वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने और बड़े पैमाने पर मूल्य सृजन करने की क्षमता प्रदर्शित होगी।
ग्राहकों और 5G विस्तार में नया रिकॉर्ड
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान जियो ने अपने ग्राहक आधार को लगातार बढ़ाते हुए 52 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ताओं तक पहुंचा दिया है। इनमें बड़ी संख्या ऐसे ग्राहकों की है जो कंपनी की 5G सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं।
चीन को छोड़कर देखा जाए तो जियो का नेटवर्क दुनिया के सबसे बड़े सिंगल-नेशन 5G नेटवर्क्स में गिना जा रहा है। कंपनी के अनुसार, डेटा उपयोग में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है और नेटवर्क पर ट्रैफिक लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है।
एयरफाइबर बना ग्रोथ का नया इंजन
जियो एयरफाइबर सेवा ने भी कंपनी की विस्तार रणनीति में अहम भूमिका निभाई है। कम समय में लाखों परिवारों तक फिक्स्ड वायरलेस ब्रॉडबैंड पहुंचाकर कंपनी ने इस क्षेत्र में मजबूत उपस्थिति दर्ज की है।
कंपनी का दावा है कि उसकी एयरफाइबर सेवाओं ने उन क्षेत्रों में भी इंटरनेट पहुंचाने का काम किया है, जहां पारंपरिक ब्रॉडबैंड नेटवर्क स्थापित करना चुनौतीपूर्ण था। यही कारण है कि जियो फिक्स्ड वायरलेस ब्रॉडबैंड सेगमेंट में वैश्विक स्तर पर प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल हो चुकी है।
डिजिटल भारत के अगले चरण की ओर
जियो के IPO की तैयारी और सैटेलाइट आधारित कनेक्टिविटी पर फोकस यह संकेत देता है कि कंपनी आने वाले वर्षों में केवल टेलीकॉम ऑपरेटर की भूमिका तक सीमित नहीं रहना चाहती। उसका लक्ष्य भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को नई तकनीकों के साथ और अधिक व्यापक बनाना है।
बाजार विशेषज्ञों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि जियो का IPO निवेशकों को किस तरह आकर्षित करता है और कंपनी अपनी अगली विकास यात्रा को किस दिशा में आगे बढ़ाती है।
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