Daily Dose: विपक्ष के ‘गले मिलने’ की मजबूरी और NDA का ‘पावर गेम’!

Rakesh Sharma - National Head
5 Min Read

दिल्ली का मौसम आजकल चाहे जैसा भी हो, लेकिन सियासी गलियारों में पसीना बहुत बह रहा है। 8 जून को ‘INDIA’ अलायंस ने कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में एक, ‘कॉफी विद इंडिया’ जैसा मंथन किया, और 10 जून को एनडीए ‘भारत मंडपम’ में, ‘शक्ति-प्रदर्शन’ का ग्रैंड फिनाले करने जा रहा है। कुल मिलाकर, कुर्सी की इस दौड़ में कौन किसके साथ है और कौन किसकी पीठ में छुरा घोंपने की तैयारी में है — ये समझना आइंस्टीन के ‘थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी’ से भी कहीं ज़्यादा टेढ़ी खीर है!

आज की डोज में कांगेस नीत और भाजपा नीत गठबंधनों की बैठकों की हलचल शामिल है।

कल 8 जून 2026 को ‘INDIA’ अलायंस की बड़ी बैठक हुई। 25 पार्टियां, ढेरों मुद्दे, और खड़गे साहब का वो 5 सूत्रीय ‘मैन्यू कार्ड’! वोटर लिस्ट से लेकर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक, सब पर सहमति बनी। लेकिन ज़मीनी हकीकत क्या है ? ये गठबंधन उस ‘वॉट्सऐप ग्रुप’ जैसा है, जिसमें सब ‘Add’ तो हैं, नोटिफिकेशन सबने म्यूट कर रखा है, और ग्रुप एडमिन बेचारा अकेला ‘मेसेज’ पर ‘मेसेज’ किए जा रहा है, जिसे कोई पढ़ ही नहीं रहा!

और फिर, राहुल-अखिलेश की वो ‘दोस्ती वाली तस्वीरें’! 2027 के यूपी चुनाव की बिसात अभी से बिछाई जा रही है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या ये ‘गठबंधन 2.0’ है ? भाई, ‘गठबंधन 2.0’ तो ठीक है, लेकिन ये ‘एक्सपायरी डेट’ से पहले काम करेगा या ‘दही’ की तरह खट्टा हो जाएगा, ये तो वक्त ही बताएगा। फिलहाल तो ये बस एक ‘फोटो-ऑप’ है, जो सोशल मीडिया के लाइक और शेयर पाने के लिए बहुत ‘शानदार’ है!

अब आते हैं उस पार्ट पर, जिसने विपक्षी एकता को ‘सीरियल’ बना दिया है। 24 घंटे में दो बार मुलाकात! 8 जून को सोनिया गांधी का ममता दीदी का गले लगाना और फिर अगले दिन 10 जनपथ पर, 10 मिनट की ‘गुफ्तगू’…।

इसे आप ‘आत्मीयता’ कहेंगे या ‘डूबते हुए जहाजों का आपसी प्रेम’? बंगाल में जमीन खिसक चुकी है, पार्टी के अंदर ‘बागियों’ का हुजूम है, और दीदी को अब ‘शेरनी’ से, ‘जरूरत’ वाली ममता बनने की जल्दी है। सोनिया जी की वो गर्मजोशी देखकर ऐसा लगा, जैसे पुरानी फिल्म का ‘बिछड़ा यार’ सीन चल रहा हो। सवाल ये है कि क्या ये दो खिलाड़ी एक-दूसरे की डूबती नैया पार लगा पाएंगी ? या फिर ये सिर्फ हार के गम में, एक-दूसरे के कंधे पर सिर रखकर, ‘सुकून’ ढूंढने का एक इमोशनल ड्रामा है? राजनीति में ‘गले’ तो वही मिलते हैं, जिनके अपने पास ‘दांव’ नहीं बचे होते!

एनडीए का ‘शक्ति-प्रदर्शन’: 12 साल बेमिसाल, बाकी सब बेहाल!

उधर सत्ता के गलियारे में मूड कुछ और है। PM मोदी के 12 साल! रिकॉर्ड-तोड़ शासन। 10 जून को NDA, ‘भारत मंडपम’ में अपनी ‘स्ट्रेंथ’ दिखाएगा। मंत्रिमंडल में फेरबदल की सुगबुगाहट है और वो ‘परिसीमन बिल’— जो विपक्ष की नींद उड़ाने के लिए काफी है।

अगर TMC के बागी नेता एनडीए की तरफ ‘लुढ़के’— और उम्मीद है कि वो लुढ़केंगे भी, क्योंकि सत्ता की गुरुत्वाकर्षण शक्ति ही ऐसी है — तो मान लीजिए कि ‘इंडी’ का बचा-खुचा ताश का पत्ता भी हवा में उड़ जाएगा। NDA अब सिर्फ ‘मीटिंग’ नहीं कर रहा, वो विपक्ष को एक बहुत साफ़ संदेश दे रहा है : “भाई, तुम लोग बैठकों के मेन्यू तय करो, फैसले तो हम ही करेंगे!”

तो कहानी एकदम ‘Clear’ है। विपक्ष हर दो महीने में मिलने की ‘तारीख’ पर तारीख मांग रहा है, और सत्ता पक्ष रोज नए ‘कीर्तिमान’ बना रहा है। अब जनता को तय करना है कि उन्हें ‘गले मिलकर रोने’ वाली राजनीति चाहिए या ‘परिसीमन’ से बदलने वाली भविष्य की तस्वीर।

वैसे, सोनिया जी और ममता दीदी की उस ‘आत्मीयता’ को देखकर, एक बात तो तय हो गई है — सियासत में ‘दिल’ भले ही न मिले, लेकिन जब ‘कुर्सी’ पर संकट हो और ‘इरादे’ कमज़ोर पड़ें, तो अजनबी भी ‘गले’ मिल ही जाते हैं!

‘DAILY DOSE’ में आज के लिए बस इतना ही। देखते रहिए, क्योंकि सियासत के इस सर्कस में ‘दांव’ कब, कहां और किसके साथ पलट जाए, इसका कोई ‘गारंटी कार्ड’ नहीं होता!

नमस्कार। जय हिंद।

Share This Article
Leave a Comment