बंगाल की राजनीति का पारा इस वक्त इतना बढ़ा हुआ है कि दिल्ली की गर्मी भी इसके आगे फीकी पड़ जाए! ममता बनर्जी की TMC, जो कल तक ‘अजेय’ दिखती थी, आज उसी के गलियारों में बगावत की ‘आहट’ नहीं, बल्कि ‘भूचाल’ की गूंज सुनाई दे रही है। क्या बंगाल में महाराष्ट्र वाला ‘शिंदे-मोडल’ सक्रिय हो गया है ? क्या ममता दीदी की कुर्सी के नीचे से जमीन खिसकने लगी है ? सत्ता बदलने के साथ ही बंगाल में खेला होबे के कई ऐपिसोड्स देखने को मिल रहे हैं और आगे भी देखने को मिलते रहेंगे। जिसमें ज्यादा ट्विस्ट होगा, पब्लिक वॉच टाइम भी उसी का ज्यादा होगा।
आज की डोज में चर्चा है, रिजू दत्ता के उस ‘धमाके’ की, जिसने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है! क्या बंगाल में भी ‘खेला’ हो गया ? सुनिए साहब, खेल बड़ा है। पूर्व TMC प्रवक्ता रिजू दत्ता ने दावा किया है कि 50 विधायक ममता बनर्जी की ‘मर्जी’ से नहीं, बल्कि अपनी ‘अर्जी’ से अलग होने को तैयार बैठे हैं।
आंकड़ा समझिये साहब : बंगाल विधानसभा में TMC के पास 80 विधायक हैं। दलबदल कानून की ‘लक्ष्मण रेखा’ दो-तिहाई, यानी करीब 54 विधायकों की है। दत्ता दावा कर रहे हैं कि 50 तो हो चुके हैं, बस कुछ और की देरी है! यानि, ये बागी गुट खुद को ‘असली टीएमसी’ बताकर, स्पीकर के दरबार में हाजिरी लगाने की तैयारी में है। वाह! क्या सियासत है। आज आप ‘असली’, कल आप ‘नकली’। कुर्सी और चुनाव चिन्ह के लिए ये लोग पार्टी को किसी भी नाम से पुकारने को तैयार हैं। भाई, असली तो वो है जिसकी जेब में नंबर हैं, बाकी सब तो ‘इमोशन’ है! अब बात उस शख्स की, जिसने ये आग लगाई है। रिजू दत्ता! वही रिजू, जो कल तक UP के IPS अजय पाल शर्मा को धमकी दे रहे थे — “हम आपको बंगाल खींच लाएंगे।” तेवर ऐसे थे, जैसे साक्षात काल का बुलावा दे रहे हों।
लेकिन भाई साहब, सत्ता का नशा उतरा तो ‘शेर’ ने, भाजपा के सामने ‘म्याऊं’ करना शुरू कर दिया। पार्टी से निलंबन हुआ, तो अब विभीषण बनकर, अंदर की खबरें बाहर फेंक रहे हैं। दत्ता कह रहे हैं कि “असली TMC हम हैं, रीताब्रत बंदोपाध्याय विपक्ष के नेता होंगे।” साहब, इसे कहते हैं — ‘अपना घर जलाकर, पड़ोसी को तमाशा दिखाना।’ लेकिन ठहरिये! ये सब इतना आसान भी नहीं है। रिजू दत्ता का कहना है कि विधानसभा में जमा कागजों पर हस्ताक्षर जाली थे। अगर ये सच है, तो मामला ‘पार्टी’ से निकलकर, ‘जेल’ तक पहुंच सकता है। वहीं, 60 विधायक बैठक में नहीं आए ? अगर ये सच है, तो ममता दीदी के ‘मौन’ का मतलब क्या है ?
क्या वो शांत हैं या तूफान आने से पहले की खामोशी है ?
और अब अंत में एक और ‘ट्विस्ट’। बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का, पार्टी के चाणक्य, अमित शाह समेत भाजपा नेतृत्व से मुलाकात का कार्यक्रम है। एजेंडा है — विभागों का बंटवारा। लेकिन साहब, ये मीटिंग ऐसे वक्त पर हो रही है, जब बंगाल की हवा में ‘सत्ता परिवर्तन’ की खुशबू आ रही है। क्या ये महज इत्तेफाक है ? या फिर दिल्ली के ‘चाणक्य’ ने कोई ऐसी बिसात बिछाई है, जहां बंगाल की ‘दीदी’ को, अपनी ही जमीन पर ‘चेक-मेट’ करने की तैयारी है ? तो साहब, बात सिर्फ विधायकों की नहीं है, बात इस ‘अहंकार’ की है जो अक्सर सत्ता के गलियारों में घुटनों के बल आ जाता है।
एक तरफ ममता दीदी हैं — जो कभी ‘खेला होबे’ का नारा देकर विरोधियों के छक्के छुड़ाती थीं, आज उन्हीं की पार्टी में ‘खेला’ उनके अपने घर के आंगन में हो रहा है। दीदी की चुप्पी इस बात का सबूत है कि या तो उनके पास जवाब खत्म हो गए हैं, या फिर उन्हें भी अंदाज़ा हो गया है कि कुर्सी की पायें अब हिलने लगी हैं। जब घर के सदस्य ही ‘असली’ होने का दावा ठोकने लगें, तो समझ जाइए — दीदी का ‘मैजिक’ अब डाइल्यूट हो रहा है।
और दूसरी तरफ हैं रिजू दत्ता—कल तक जो ‘शेर’ बनकर दहाड़ रहे थे, आज वही ‘विभीषण’ बनकर पार्टी की नींव खोद रहे हैं। रिजू साहब, सत्ता का नशा ऐसा उतरा कि अब माफी की मिन्नतें हैं और ‘असली-नकली’ के सर्टिफिकेट बांटे जा रहे हैं। वाकई, राजनीति में इंसान का ‘गिरगिट’ बनना तो सुना था, लेकिन रिजू दत्ता ने तो ‘गिरगिट’ को भी पीछे छोड़ दिया है!
ममता दीदी का ‘अहंकार’ और रिजू दत्ता का ‘गद्दार’ वाला यह कॉकटेल, बंगाल की राजनीति में ‘सियासी जहर’ घोल चुका है। अब तो बस ये देखना बाकी है कि जब ये ‘महाराष्ट्र मॉडल’ का बम फटेगा, तो उसमें ममता दीदी की TMC बचेगी, या सिर्फ मलबे में रिजू दत्ता के दावों के टुकड़े मिलेंगे ?
साहब, ये वो बंगाल है जहां ‘खेला’ होता नहीं, ‘खेला’ किया जाता है। और इस बार ‘खेला’ दीदी के साथ हो रहा है या दीदी का, ये तो वक्त ही बताएगा !
नमस्कार।
जय हिंद।
