हार के बाद TMC पर डबल अटैक! अब ‘जाली हस्ताक्षर घोटाले’ ने बढ़ाई ममता बनर्जी की टेंशन

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Image: News18 Hindi

पश्चिम बंगाल विधानसभा में प्रस्तुत आधिकारिक दस्तावेजों पर कई पार्टी विधायकों के हस्ताक्षर जाली होने के आरोपों के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) अपने सबसे गंभीर आंतरिक संकटों में से एक का सामना कर रही है। “साइनगेट” नाम से चर्चित इस विवाद के चलते सीआईडी ​​​​ने जांच शुरू कर दी है, जिसके चलते दो टीएमसी विधायकों को निष्कासित कर दिया गया है और पार्टी के वरिष्ठ नेता भी जांच के दायरे में आ गए हैं।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद पश्चिम बंगाल विधानसभा में 2026 के विधानसभा चुनावों के बाद विपक्ष के नेता और पार्टी के मुख्य सचेतक की नियुक्ति से संबंधित दस्तावेजों को लेकर है। आरोप हैं कि दस्तावेजों पर मौजूद कई टीएमसी विधायकों के हस्ताक्षर या तो जाली हैं या उनकी उचित सहमति के बिना किए गए हैं।

यह विवाद तब और बढ़ गया जब टीएमसी के विधायकों ऋतब्रता बनर्जी और संदीपान साहा ने विपक्ष के नेता पद के लिए वरिष्ठ टीएमसी नेता शोवनदेब चट्टोपाध्याय का समर्थन करने वाले पत्र में इस्तेमाल किए गए हस्ताक्षरों की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए। उनकी शिकायतों के बाद पश्चिम बंगाल अपराध जांच विभाग (सीआईडी) ने औपचारिक जांच शुरू की।

विधानसभा सचिव ने इसके बाद एफआईआर दर्ज कराई और जांचकर्ताओं ने विवादित दस्तावेजों में शामिल विधायकों के बयान और नमूना हस्ताक्षर एकत्र करना शुरू कर दिया। सीआईडी ​​अधिकारियों ने जांच के तहत कई टीएमसी विधायकों के बयान दर्ज कर लिए हैं।

शर्मिंदगी का कारण क्यों?

यह मुद्दा विशेष रूप से गंभीर है क्योंकि इसने उस पार्टी के भीतर आंतरिक असहमति के संकेत उजागर किए हैं जिस पर लंबे समय से उसके नेतृत्व का कड़ा नियंत्रण रहा है। यह घोटाला तब और बढ़ गया जब टीएमसी ने विधायकों ऋतब्रता बनर्जी और संदीपान साहा को पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाते हुए निष्कासित कर दिया। विधायकों द्वारा हस्ताक्षरों पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाने के तुरंत बाद निष्कासन की कार्रवाई की गई, जिससे संगठन के भीतर बढ़ती दरारों के बारे में अटकलें तेज हो गईं।

टीएमसी के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को भी जांच के सिलसिले में सीआईडी ​​ने तलब किया है, जिससे यह विवाद पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के और करीब आ गया है।

चुनाव में करारी हार के तुरंत बाद सामने आया यह विवाद अब केवल कागजी कार्रवाई को लेकर एक साधारण विवाद से कहीं आगे बढ़कर पार्टी के अनुशासन और नेतृत्व के अधिकार की परीक्षा बन गया है।

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Edited by: Bhoomi Goyal

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