मुंबई की तंग गलियां… अंडरवर्ल्ड की काली दुनिया… Dawood इब्राहिम का खूंखार साम्राज्य… और उस साम्राज्य का एक ऐसा शूटर, जिसका निशाना शायद ही कभी चूकता था। एक ऐसा नाम… जिसे कभी मुंबई पुलिस ढूंढ रही थी… फिर थाईलैंड की जेल ने कैद कर लिया… और आज वही शख्स पाकिस्तान में बैठकर भारत के खिलाफ नई साजिशें रचने के आरोपों के कारण फिर चर्चा में है। नाम है… मुन्ना झिंगाड़ा।
वही मुन्ना झिंगाड़ा… जिसे कभी Dawood इब्राहिम का सबसे भरोसेमंद शार्पशूटर कहा जाता था। और अब… दिल्ली पुलिस द्वारा हाल ही में गिरफ्तार किए गए 9 संदिग्ध आतंकियों की जांच में सामने आए खुलासों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। क्योंकि जांच एजेंसियों का दावा है कि पाकिस्तान में बैठा यह पुराना गैंगस्टर अब सिर्फ एक अपराधी नहीं रहा… बल्कि भारत विरोधी गतिविधियों को समन्वित करने वाले नेटवर्क का हिस्सा बन चुका है। चलिए आपको बताते हैं कि आखिर कौन है मुन्ना झिंगाड़ा? कैसे एक मुंबई का गैंगस्टर पाकिस्तान तक पहुंच गया? और क्यों उसका नाम एक बार फिर भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की फाइलों में सबसे ऊपर दिखाई दे रहा है?
तो कहानी शुरू होती है मुंबई के जोगेश्वरी इलाके से… 90 का दशक… मुंबई में अंडरवर्ल्ड अपने चरम पर था। Dawood इब्राहिम और छोटा शकील का नेटवर्क तेजी से फैल रहा था। उधर Dawood के पुराने साथी छोटा राजन से दुश्मनी भी खुलकर सामने आ चुकी थी। इसी दौर में एक युवक तेजी से डी-कंपनी के भीतर अपनी पहचान बना रहा था। उसका नाम था… मुन्ना झिंगाड़ा।
कहा जाता है कि उसका निशाना इतना सटीक था कि गैंग के सबसे मुश्किल ऑपरेशन उसे सौंपे जाते थे। हत्या.. वसूली… गैंगवार… उस पर दर्जनों गंभीर आपराधिक मामलों के आरोप लगे। धीरे-धीरे वह Dawood और छोटा शकील का भरोसेमंद आदमी बन गया।
लेकिन साल 2000 में ऐसा कुछ हुआ जिसने मुन्ना झिंगाड़ा को अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया। बैंकॉक… थाईलैंड की राजधानी। यहीं पर छोटा राजन रह रहा था। Dawood और राजन की दुश्मनी उस वक्त अपने चरम पर थी। आरोप है कि छोटा शकील के निर्देश पर मुन्ना झिंगाड़ा अपने साथियों के साथ थाईलैंड पहुंचा। मिशन सिर्फ एक था… छोटा राजन को खत्म करना। इसके बाद बैंकॉक में राजन पर जानलेवा हमला हुआ। गोलियां चलीं… खून बहा… राजन गंभीर रूप से घायल हो गया। हालांकि वह बच गया… लेकिन उसका करीबी सहयोगी रोहित वर्मा इस हमले में मारा गया।
इस घटना ने पूरे अंडरवर्ल्ड को हिला दिया। मुंबई से लेकर दुबई और बैंकॉक तक गैंगवार की आग और भड़क उठी। लेकिन इस बार किस्मत ने मुन्ना झिंगाड़ा का साथ नहीं दिया। थाई पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। और यहीं से शुरू हुई एक ऐसी कानूनी लड़ाई जो लगभग दो दशकों तक चली। गिरफ्तारी के समय उसके पास से एक पाकिस्तानी पासपोर्ट मिलने की बात सामने आई। पासपोर्ट पर नाम था… मोहम्मद सलीम।
यहीं से नया विवाद खड़ा हो गया। भारत कह रहा था कि वह मुंबई का रहने वाला भारतीय नागरिक है। जबकि पाकिस्तान उसे अपना नागरिक बता रहा था। दो देशों के बीच कानूनी दावों और अदालतों की सुनवाई का लंबा दौर चला। कई बार लगा कि झिंगाड़ा भारत लाया जाएगा। लेकिन आखिरकार 2019 में घटनाक्रम ने ऐसा मोड़ लिया जिसने भारतीय एजेंसियों को बड़ा झटका दिया। थाईलैंड ने उसे भारत की बजाय पाकिस्तान को सौंप दिया। और इसके बाद मुन्ना झिंगाड़ा कराची पहुंच गया। यहीं से कहानी का सबसे खतरनाक अध्याय शुरू होता है।
Dawood: जांच एजेंसियों के अनुसार… कराची पहुंचने के बाद वह एक बार फिर Dawood इब्राहिम के नेटवर्क में सक्रिय हो गया। लेकिन इस बार मामला सिर्फ गैंगवार या वसूली तक सीमित नहीं था। सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि वह पाकिस्तान में बैठे उन तत्वों के संपर्क में आ गया जो भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने की कोशिश करते रहे हैं। हाल ही में दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए 9 संदिग्ध आतंकियों की जांच में जो जानकारी सामने आई, उसने एजेंसियों की चिंता और बढ़ा दी। प्रारंभिक जांच के अनुसार गिरफ्तार लोगों के संपर्क विदेशी हैंडलरों से थे। उनके बीच एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के जरिए बातचीत हो रही थी। आरोप है कि इन लोगों को महत्वपूर्ण ठिकानों की रेकी करने, स्थानीय नेटवर्क तैयार करने और संभावित हमलों की योजना बनाने के निर्देश दिए जा रहे थे। जांच के दौरान हथियार, विस्फोटक और अन्य सामग्री भी बरामद होने की बात कही गई है। एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इन नेटवर्कों की कमान आखिर किसके हाथ में थी। और इसी जांच के दौरान मुन्ना झिंगाड़ा का नाम फिर सामने आया।
Dawood: अधिकारियों का मानना है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं है। बल्कि यह उस पुराने गठजोड़ की कहानी है जिसने दशकों पहले मुंबई समेत देश के कई हिस्सों को दहला दिया था। दाऊद इब्राहिम… डी-कंपनी… और पाकिस्तान में मौजूद नेटवर्क… क्या यह गठजोड़ एक बार फिर सक्रिय होने की कोशिश कर रहा है? क्या सिकुड़ते हुए डी-कंपनी नेटवर्क को फिर से प्रासंगिक बनाने की कोशिश चल रही है? या फिर यह सिर्फ पुराने अपराधियों के नए चेहरे हैं? इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
Dawood: लेकिन एक बात साफ है… मुंबई की गलियों से निकला वह शार्पशूटर… जिसे कभी अंडरवर्ल्ड का सबसे खतरनाक शार्पशूटर कहा जाता था… आज भी भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। और यही वजह है कि… मुन्ना झिंगाड़ा का नाम एक बार फिर देश की सुरक्षा से जुड़ी सबसे संवेदनशील फाइलों में दर्ज हो चुका है। अब देखना होगा कि जांच एजेंसियां इस नेटवर्क की कितनी परतें खोल पाती हैं… और क्या आने वाले दिनों में इस कहानी से जुड़े और भी बड़े खुलासे सामने आते हैं। आपको क्या लगता है एक बार फिर से डी कंपन्नी एक्टिव हो सकती है…
Read More: राजधानी दिल्ली में आतंकी साजिश नाकाम, ISI लिंक वाले 9 आरोपी गिरफ्तार
