पोखरण…. जब गूंजी भारत की शक्ति! | परमाणु विजय की पूरी कहानी

Atul Ahsas
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जन भारत — स्माइल से शक्ति तक।

आज 11 मई है। दुनिया इसे ‘नेशनल टेक्नोलॉजी डे’ कहती है, लेकिन भारत के लिए यह दिन हमारे पूर्वजों के उस DNA का प्रमाण है, जिसने कभी झुकना नहीं सीखा। आज पोखरण की रेतीली धरती से जो परमाणु हुंकार उठी थी, उसमें छत्रपति शिवाजी महाराज की कूटनीति, महाराणा प्रताप का स्वाभिमान और शहीद भगत सिंह का इंकलाब समाहित है!
हम ना भूले थे, ना भूलेंगे। शिवाजी महाराज ने सिखाया था कि जब दुश्मन बड़ा हो, तो उसे रणनीति से मात दो। 1998 में भी यही हुआ। जब दुनिया के सैटेलाइट्स भारत पर नज़र गड़ाए थे, तब हमारे वैज्ञानिकों ने ‘गनिमी कावा’ यानी छापामार रणनीति अपनाई। अमेरिका की CIA सोती रही और भारत ने दुनिया की आँखों में धूल झोंककर, परमाणु परीक्षण कर दिया। यह आधुनिक युग की वैसी ही सर्जिकल स्ट्राइक थी, जैसी शिवाजी महाराज ने लाल महल में की थी।
1998 के बाद दुनिया ने प्रतिबंध लगाए, हमें भूखा मारने की धमकी दी। लेकिन तब भारत की रगों में महाराणा प्रताप का रक्त दौड़ रहा था। जैसे प्रताप ने घास की रोटी चुनी लेकिन मुगलों की अधीनता नहीं, वैसे ही भारत ने दुनिया के आगे झुकने से इनकार कर दिया। हमने दिखा दिया कि भारत पाबंदी सह सकता है, लेकिन अपने स्वाभिमान से समझौता कभी नहीं करेगा! ‘जन भारत’ आज उन जांबाज वैज्ञानिकों को सलाम करता है।
1929 में भगत सिंह ने असेंबली में बम फेंका था, ताकि ‘बधिरों को सुनाया जा सके’। 11 मई 1998 का धमाका भी वैसा ही था — उन महाशक्तियों को सुनाने के लिए, जो भारत को अनसुना कर रही थीं। 1974 की शांतिपूर्ण मुस्कान, ‘स्माइलिंग बुद्धा’ के बाद, यह धमाका उस इंकलाब की गूंज थी, जिसने दुनिया को बता दिया कि अब भारत किसी के रहमोकरम पर नहीं, अपनी शर्तों पर जिएगा।
पिछले 30 सालों में भारत सिर्फ परमाणु देश नहीं, बल्कि वह ‘शक्ति’ बना है जिसका सपना क्रांतिकारियों ने देखा था। जहां कभी किलों से रक्षा होती थी, आज ‘मिसाइल शील्ड’ सीमाओं को सुरक्षित करती है। यह 2026 का भारत है — जो बुद्ध की तरह शांत है, लेकिन अगर छेड़ा गया, तो इसमें शिवाजी की चाल और प्रताप की तलवार जैसी मारक क्षमता है! ‘जन भारत’ की दुनिया को सीधी चुनौती है — खबरदार! ना आँखें दिखाना, ना होशियारी करना, वर्ना नेस्तानाबूत हो जाओगे।
11 मई को जो फटा था, वो बम नहीं, वो सदियों का अपमान और बेड़ियां थीं जिन्हें हमने, एक झटके में तोड़ दिया! यह धमाका उन पर तमाचा था, जो हमें लाचार कहते थे। आज दुनिया हमारे ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘स्पेस मिशन’ के आगे नतमस्तक है। पोखरण की धूल आज हमारे माथे का तिलक है।
शक्ति के इस महापर्व पर, राजस्थान की इस वीर धरा से ‘जन भारत’ के लिए हम बस यही कहेंगे — याद रखिएगा, हमारी शांति हमारी कमजोरी नहीं, हमारी शक्ति का श्रृंगार है।”

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