राम-राम सा!
भारत में दो ही चीजें सबसे ज्यादा बिकती हैं—एक क्रिकेट और दूसरा उम्मीद। बीसीसीआई ने इन दोनों को मिलाया और परोसा एक ऐसा ‘इको-फ्रेंडली’ सपना, जिसमें हर खाली गेंद (डॉट बॉल) से धरती हरी-भरी होनी थी। टाटा का नाम जुड़ा तो लगा कि अब तो रेगिस्तान में भी हरियाली की बाढ़ आ जाएगी! लेकिन साहब, आईपीएल के चार सीजन गुजर गए, लाखों पेड़ों का हिसाब कागजों पर ‘नॉट आउट’ खेल रहा है, पर हकीकत के मैदान पर एक पत्ता तक हिलता दिखाई नहीं दे रहा।
आज हम बीसीसीआई की उस ‘अदृश्य हरियाली’ का पोस्टमॉर्टम करेंगे, जो सिर्फ स्कोरबोर्ड के डिजिटल पेड़ वाले इमोजी में फल-फूल रही है!”
ग्रीन डॉट बॉल (Green Dot Ball) आईपीएल की एक विशेष पर्यावरणीय पहल है, BCCI और Tata Group ने मिलकर शुरू किया है। इसका उद्देश्य वाकई तारीफ—ए—काबिल है. टूर्नामेंट के दौरान होने वाले कार्बन उत्सर्जन (Carbon Footprint) को कम करना है, पर्यावरण के हिसाब से बहुत ही महत्वपूर्ण पहल है।
अभी मई 2026 की शुरुआत ही हुई है और भारत ‘हीट-डोम’ की गिरफ्त में है। महाराष्ट्र के अकोला में पारा 46.9°C को छू चुका है, तो हमारे राजस्थान में भीषण गर्मी का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। फलौदी और जैसलमेर में सूरज आग उगल रहा है। अप्रैल 2026 के आखिरी हफ्तों में भारत के 100 में से, 92 से 98 शहर दुनिया के सबसे गर्म शहरों की सूची में रहे। 100 में से 92 से 98 यानि 98 प्रतिशत तक ये आंकड़ा पहुंच गया। राजस्थान के कई हिस्सों में सूर्यदेव के तीखे तेवर, लोगों को झुलसा रहे हैं।
साहब, गर्मी ऐसी है कि सड़क पर आम इंसान का दम घुट रहा है, पारा रिकॉर्ड तोड़ रहा है और टेंपरेचर का ग्राफ लगातार लाल निशान दिखा रहा है। ऐसे में सवाल पूछना तो बनता है — अगर बीसीसीआई के दावों के मुताबिक सच में अब तक 6 लाख 72 हजार पेड़ लगाए जा चुके हैं, तो भारत के तापमान में ये ‘कूलिंग इफेक्ट’ क्यों नहीं दिख रहा ? क्या ये पेड़ किसी एयर-कंडीशनर वाले कमरे में लगाए गए हैं ? या फिर ये पेड़ भी बीसीसीआई की तरह सिर्फ अमीर लोगों को अपनी छाया दे रहे हैं ?
हिसाब लगाया गया कि 2023 के सिर्फ 4 मैचों में डेढ़ लाख पेड़ लगे ! ये अलग बात है कि पहले पौधे का, सौवें का, हजार या लाख नंबर वाले पौधे लगाने की ना कोई तस्वीर, ना कोई उद्धाटन समारोह, बस खामोशी से प्रोजेक्ट पूरा हो गया। सोच के देखिए BCCI, सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड और IPL, सबसे बड़ी क्रिकेट लीग और पर्यावरण से जुड़ी ये ग्रीन डॉट बॉल वाली पहल ऐसे में हमने सोचा कि बीसीसीआई ना सही, कम से कम आईपीएल के सोश्यल मीडिया में तो इससे जुड़ी पोस्ट ओर फोटोज मिल जाएंगी। हमें Contenders to Emerging players, Youngest to 4000 IPL runs, Most win in IPL, Highest Successful Chases, Image of the Day, Orange Cap, Purple Cap, ये सब पोस्ट्स तो दिखीं लेकिन जो हम ढूंढ रहे थे, वो ना मिला। भला इस पौधे लगाने वाली बड़ी पहल को, दुनिया की नजर से क्यों बचाए रखा ?? क्या किसी की नजर लगने का डर था ???
आइए, अब 2024 में चलते हैं, जहां पेड़ों का आंकड़ा 4 लाख पार हो गया और अब 2026 में कुल दावा, साढ़े छह लाख से ऊपर है। गजब की बात देखिए — जिस देश में एक खिलाड़ी नई हेयरस्टाइल भी रखे तो उसकी 500 तस्वीरें इंस्टाग्राम पर तैरने लगती हैं, वहां लाखों पेड़ों के वृक्षारोपण की एक भी ‘ऑथेंटिक’ वीडियो रील नहीं है ? दुनिया का सबसे अमीर बोर्ड, जो हर चौके-छक्के पर करोड़ों की लाइटें जला देता है, क्या उसके पास एक कैमरा नहीं था, जो इन ‘IPL जंगलों’ की शान दिखा सके ?
क्या बात कर रहे हैं साहब ?? क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं, एंटरटेनमेंट का पूरा कंपलीट डोज, मनोरंजन का पूरा पैकेज है। और क्रिकेटर्स, सिर्फ खिलाड़ी नहीं, फैंस के लिए भगवान की तरह होते हैं….अब ये भगवान, कहीं घूमने जाएं, नई गाड़ी खरीदें, किसी फंक्शन में जाएं, मेक—अप करें, वोट डालने जाएं और साहब सोश्यल मीडिया पर फोटोज ना डालें, स्टेटस ना लगाएं,, भला ऐसा हो सकता है ???? एक बार के लिए वो सांस लेना भले ही भूल जाएं, लेकिन सोश्यल मीडिया के किसी प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करना नहीं भूल सकते।
एक मिनट रूकिए, ग्रीन डॉट बॉल पहल से जुड़ी एक पोस्ट आई थी दिसंबर 2024 तक, बीसीसीआई ने बेंगलुरु के ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ में अपना 4,00,000वां पौधा लगाकर, इस उपलब्धि का जश्न मनाया। बधाई बनती है लेकिन साहब, फैंस के साथ—साथ हमें ये बात पच नहीं रही कि आखिर इस पहल की पहली, सौवी, हजारवी और एक लाख पेड़ लगाने की ख़बर की तस्वीर क्यों नहीं खिंची गई ??
ऐसे में बीसीसीआई और आयोजक समिति से कुछ सवाल बनते हैं और ये बिल्कुल सीधे सवाल हैं :
1 – क्या आपने पेड़ों को भी ‘बायो-बबल’ में रखा है कि आम जनता उन्हें देख नहीं सकती? या फिर ये पेड़ किसी ऐसे ‘मिस्टर इंडिया’ वाले पाउडर से सींचे गए हैं, जिन्हें देखते ही वे गायब हो जाते हैं ?
2 – क्या इन पेड़ों को सैटेलाइट से ट्रैक करने का कोई प्रूफ है, या फिर ये पेड़ भी किसी ‘सीक्रेट आइलैंड’ पर लगे हैं? वहीं मंत्रालय और सरकार से भी सवाल है कि क्या पर्यावरण मंत्रालय ने इन आंकड़ों का कभी ‘थर्ड-अंपायर’ रिव्यू किया है ? या फिर ये पेड़ भी, किसी चुनावी वादे की तरह सिर्फ घोषणाओं के गमले में लगे हैं ? पर्यावरण मंत्रालय आखिर क्यों इन कागजी आंकड़ों पर खामोश बैठा है ?
वैसे केंद्र सरकार से जवाब आने में समय लग सकता है, लेकिन यदि हम भूपेंद्र यादव जी से सवाल करेंगे तो शायद ये सवाल मोदी सरकार तक जल्द पहुंच जाएगा और जवाब आने की संभावना बढ़ जाएगी। आप तो जानते ही हैं कि हमारे अपने, राजस्थान के भूपेंद्र यादव, भारत सरकार में वर्तमान केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री हैं। अनुभवी हैं, ज्यादा सोशेबाजी में नहीं रहते और इमेज भी अच्छी है। अलवर के सांसद हैं और मोदी सरकार के इस तीसरे कार्यकाल में भी कैबिनेट मंत्री के रूप में अपना दायित्व निभा रहे हैं।
आखिर IPL का शुरुआती सीजन राजस्थान के रणबांकुरों, ‘राजस्थान रॉयल्स’ के नाम रहा है और इस सीजन में भी हमारे शेर, ट्रॉफी के प्रबल दावेदार हैं। गर्व तो महसूस होगा ही ! पर BCCI और IPL आयोजक कान खोलकर सुन लें — माना कि हम राजस्थान वाले भोले-भाले हैं, अपने काम से काम रखते हैं। माना कि मारवाड़ियों ने पूरी दुनिया में अपनी मेहनत से नाम कमाया है… लेकिन हमारे भोलेपन का इतना फायदा मत उठाइए !
IPL के नाम पर भावनाओं से खिलवाड़ करने का अधिकार हमने किसी को नहीं दिया है। कृपया हमारे सब्र का इम्तेहान न लें। और हां, IPL का सबसे बड़ा ‘यक्ष प्रश्न’ — कि ये ‘ग्रीन डॉट बॉल’ इनिशियेटिव के पेड़ कहां लगे हैं — इसकी पूरी जानकारी बहुत ही जल्द देश के सामने आने वाली है। क्योंकि भले ही बोर्ड, कंपनी या ऑर्गेनाइजिंग कमेटी तथ्यों के साथ ‘गुगली’ खेल रही हो, लेकिन मोदी सरकार और उनके मंत्री ईमानदारी से अपना दायित्व निभा रहे हैं। हमें पूरा यकीन है कि हमें जल्द ही वो ‘लाखों पेड़ों का जंगल’ मिलने वाला है, क्योंकि भूपेंद्र यादव जी हमें निराश नहीं करने वाले।
साहब, आईपीएल वालों को शायद लगता है कि हम राजस्थान वाले सिर्फ बाजरे की रोटी और भोलापन जानते हैं। पर उन्हें कौन समझाए कि हमने भावनाओं से खिलवाड़ करने का हक किसी बोर्ड या कमेटी को ‘लीज’ पर नहीं दिया है ! हमारे सब्र का इम्तेहान मत लीजिए, क्योंकि IPL का सबसे बड़ा ‘यक्ष प्रश्न’ अब गलियों में गूँज रहा है — कि ये ‘ग्रीन डॉट बॉल’ वाली हरियाली आखिर किस पाताल में समा गई है ?
भले ही बोर्ड और आयोजक कमेटी तथ्यों के साथ ‘गुगली’ डालने की कोशिश करें, पर उन्हें याद रखना चाहिए कि सामने मोदी सरकार के मंत्री खड़े हैं जो ‘क्लीन बोल्ड’ करने में माहिर हैं। हमें पूरा भरोसा है कि हमारे भूपेंद्र यादव जी हमें निराश नहीं करेंगे और उन ‘लाखों पेड़ों के जंगलों’ का पता ढूंढ ही निकालेंगे।
आखिर क्यों न हो ? हरित क्रांति की असली अलख तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जगाई है ! याद है न ? 5 जून 2024, विश्व पर्यावरण दिवस — जब PM मोदी ने दिल्ली के बुद्ध जयंती पार्क में पीपल का पौधा लगाकर ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान का शंखनाद किया था। वो कागजी वादा नहीं, एक भावना थी!
और हमारे राजस्थान में ? यहाँ भी मामला ढीला नहीं है ! 23 जून को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपनी माताजी गोमती देवी के साथ बेल का पौधा लगाकर बता दिया कि पेड़ हमारे ‘परम मित्र’ हैं, कोई ‘प्रमोशनल टूल’ नहीं। CM साहब ने साफ कहा कि पेड़ ऑक्सीजन देते हैं, प्रदूषण रोकते हैं और जीवन बचाते हैं।
तो सवाल सीधा है — जब देश का प्रधानमंत्री और प्रदेश का मुख्यमंत्री अपनी माँ के नाम पर पौधा जमीन में गाड़कर उसे दुनिया को दिखा सकता है, तो BCCI और IPL वालों… क्या आपके पेड़ ‘शर्मीले’ हैं, जो कैमरे के सामने आने से कतरा रहे हैं ? क्या आपके पेड़ों को नजर लगने का डर है या फिर वो सिर्फ विज्ञापन के ‘ग्रीन स्क्रीन’ पर ही उगते हैं ?
हमें राजस्थान के मुख्यमंत्री से भी पूरी उम्मीद है कि वो इस ‘लापता हरियाली’ के मुद्दे पर गंभीरता से ध्यान देंगे। क्योंकि साहब, राजस्थान में पेड़ लगाना एक संस्कार है, और IPL वालों के लिए शायद ये सिर्फ एक ‘व्यापार’ है।
साहब, यह राजस्थान के साथ-साथ देश के सम्मान का मामला है। बात विदेशों तक भी पहुंचेगी क्योंकि IPL में विदेशी खिलाड़ी भी अपना पसीना बहा रहे हैं। उन्हें भी तो पता चले कि उनके द्वारा फेंकी गई ‘डॉट बॉल’ से भारत की जमीन पर सच में हरियाली उगी है या सिर्फ आयोजकों के बैंक बैलेंस में हरियाली आई है !
अंत में बस इतना ही — BCCI, IPL League से हज़ारों करोड़ रूपए कमा रहा है और हमें विरासत बचाने के उपदेश दे रहा है। लाखों पेड़ों को लगाने का वादा करके, अगर आप सिर्फ 10 लाख का चेक किसी खिलाड़ी को थमाकर फोटो खिंचवा लेंगे, तो इसे ‘पर्यावरण संरक्षण’ नहीं, ‘कॉर्पोरेट पीआर’ (PR) कहा जाता है।
हमारे भोलपन का फायदा मत उठाइए, वरना याद रखिएगा — जनता जब सवाल पूछती है, तो अच्छे-अच्छों की ‘इकोनॉमी रेट’ बिगड़ जाती है!”
“कागजों पर जो उगाए, वो जंगल नहीं होते,
सिर्फ बातों से, पर्यावरण के हल नहीं होते;
लगाए हैं अगर लाखों पेड़, तो जरा दीदार भी कराओ,
क्योंकि विज्ञापनों वाले बाग, कभी फल नहीं देते!”
हम देश के हर नागरिक और क्रिकेट फैंस से अपील करते हैं कि यदि आपको इन ‘अदृश्य जंगलों’ की एक भी तस्वीर मिले, तो हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आपकी एक तस्वीर, आपका एक कमेंट, हजारों लाखों लोगों को, फैंस को, IPL का असली वाला ‘बाग’ दिखा सकता है। थोड़ी मेहनत आप करें, उससे कहीं ज्यादा मेहनत हम करते हैं।
वो कहते हैं ना, मेहनत का फल मीठा होता है।
